गुरुवार, 24 दिसंबर 2020

चन्द माहिए : क़िस्त 90

 क़िस्त 90


1

रह-ए-इश्क़ से जो गुज़रा

दीवाना हो कर

फिरता सहरा सहरा


2

जाने अनजाने में 

उम्र गुज़र जाती

सपनों को सजाने में 


3

जीना आसान नहीं

कौन यहाँ ऐसा 

जो है परेशान  नहीं


4

दो दिल के बन्धन से

अमरित भी निकले

जीवन के मन्थन से


5

इस दिल में उतर आओ

महकेगा तन-मन

अब और न तड़पाओ 


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