शनिवार, 9 सितंबर 2023

ग़ज़ल 339 [15F] : तुमने जैसा कहा मैने वैसा किया

ग़ज़ल 339[15F]

212---212---212---212--


तुम ने जैसा कहा मैने वैसा किया
फ़िर बताओ कि मैने बुरा क्या किया ?

हाथ की तुम लकीरें रहे देखते
बाजुओं पर न तुमने भरोसा किया ।

ध्यान में वह नहीं था, कोई और था
बस दिखावे का ही तुमने सज्दा किया ।

इश्क़ क्या चीज़ है, तुमको क्या है पता
इश्क़ के नाम पर बस तमाशा किया ।

राह-ए-हक़ में क़दम दो क़दम क्या चले
चन्द लोगों ने मुझ से किनारा किया ।

क्यों जुबाँ लड़खड़ाने लगी आप की
आप ने कौन सा सच से वादा किया ।

बात ’आनन’ की चुभने लगी आप को
सच की जानिब जब उसने इशारा किया ।


-आनन्द.पाठक--

सं 28-06-24


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