अनुभूतियाँ 194/81
:1:
एक बार जो आ जाओ तुम
सुख दुख की बातें करनी है
कुछ अपनी पीड़ा कहनी है
और तुम्हारी कुछ सुननी है ।
एक टिप्पणी भेजें
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें