रविवार, 20 सितंबर 2020

चन्द माहिए : क़िस्त 79

 क़िस्त 79 : ओके


1
 ग़म अपना ढो लेंगे
पूछोगी जब तुम
"अच्छा हूँ’-बोलेंगे
2
माना जख़्मी है दिल
कैसे समझे तुम 
ये इश्क़ के नाक़ाबिल ?
3
 कैसी  ये शरारत है 
चिलमन में छुप कर
करता वो इशारत है 
4
जख़्मों को छुपा रखना
कम तो नहीं ’आनन’ 
ग़म अपना दबा रखना
5
यह जादू किसका  है ?
उजड़े चमन में भी
यह नूर जो छिटका है


-आनन्द पाठक-
x

कोई टिप्पणी नहीं: