मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

त्रिपदी 002

 त्रिपदी 002

;1:

जगत चराचर के स्वामी तुम

मम अपराध क्षमा करना, प्रभु !

मुझ पर सदा दया करना, प्रभु !


:2:

जीवन सफल उसी का जिसने

सीख लिया हो क्या होता बस

मौन समर्पण, प्रेम सुधा-रस ।


:3:

साध्य सदा रहता है मन में

साधक का जब मन पावन हो

तब ही प्रभु का शुभ दर्शन हो ।


-आनन्द.पाठक ’आनन’-

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