बुधवार, 12 जुलाई 2023

ग़ज़ल 329[05 F] : तुम्हारे ही इशारों पर--

 ग़ज़ल 329 /05F
1222---1222---1222---1222

तुम्हारे ही इशारों पर, बदलते हैं यहाँ मौसम
कभी दिल शाद होता है ,कभी होती हैं आँखें नम ।

ये ख़ुशियाँ चन्द रोज़ां की,  कब आती हैं चली जातीं
कभी क्या मुख़्तसर होती किसी की दास्तान-ए-ग़म ।

तरीक़ा आजमाने का तुम्हें लगता यही वाज़िब
सितम जितना भी तुम कर लो, नहीं होगी मुहब्बत कम ।

अजब है ज़िंदगी मेरी, न जाने क्यॊ मुझे लगता
कभी  लगती है अपनॊ सी ,कभी हो जाती है बरहम ।

रहेगा सिलसिला क़ायम सवालों का, जवाबों का
नतीज़ा एक सा होगा , ये आलम हो कि वो आलम ।

जरूरत ही नही होगी हथेली में लिखा है क्या
तुम्हें  इन बाजुओं पर हो भरोसा जो अगर क़ायम

अगर तुम सोचते हो अब यह कश्ती डूबने को है
तलातुम मे कहीं क्या छोड़ते है हौसला हमदम ?

परेशां क्यों है तू ’आनन’, ज़माने से हैं क्यॊ डरता
ये दुनिया अपनी रौ में है तू ,अपनी रौ मे चल हरदम

-आनन्द पाठक-
शब्दार्थ
मुख़्तसर  == छो्टी, संक्षेप में
बरहम = तितर बितर. नाराज़
तलातुम = तूफ़ान 
सं 26-06-24

मंगलवार, 30 मई 2023

ग़ज़ल 328[04 फ़] : मुझे क्या ख़बर किसने--

 ग़ज़ल 328[04फ़]

122--122--122--122


मुझे क्या ख़बर किसने क्या क्या कहा है
अभी मुझ पे तारी तुम्हारा  नशा  है ।

तुम्हें शौक़ है आज़माने का मुझको
हमेशा हूँ हाज़िर ,मना कब किया है |

अभी शाम में ख़त मिला जो तुम्हारा
वही मैं पढ़ा जो न तुमने लिखा है |

हज़ारों मनाज़िर मेरे सामने थे
तुम्हारे सिवा कब मुझे कुछ दिखा है ।

बदन ख़ाक की मिल गई ख़ाक में जब
ये हंगामा इतना क्यों बरपा हुआ  है ।

नई रोशनी घर में आए तो कैसे 
न खिड़की खुली है, न दर ही खुला है ।

समझ जाएगी एक दिन वह भी ’आनन’
अभी वह मुहब्बत से नाआशना है॥


-आनन्द.पाठक- 

सं 26-06-24

सोमवार, 22 मई 2023

ग़ज़ल 327 [ 03F] : ज़िंदगी में रही एक कमी उम्र भर

 ग़ज़ल 327[03F]

212---212---212---212

जिंदगी में रही इक कमी उम्र भर
इन लबों पर रही तिशनगी उम्र भर ।

तुम जो आते तो दिल होता रोशन मेरा
तुम न आए रही तीरगी  उम्र भर 

जानता हूँ मगर पूछ सकता नहीं
ज़िंदगी क्यों मुझे तुम छ्ली उम्र भर ?

ये नज़ाकत, लताफ़त ये क़ातिल अदा
किसकी क़ायम यहाँ कब रही उम्र भर !

आप की बात पर था भरोसा मुझे
राह देखा किए आप की उम्र भर

हो न लुत्फ़-ओ-इनायत भले आप की
दिल करेगा मगर बंदगी उम्र भर

सबको अपना समझते हो ’आनन’ यहाँ
कौन होता किसी का कहाँ उम्र भर ?


-आनन्द.पाठक-

सं 22-06-24