गीत : हम बंजारे नगरी नगरी ---
हम बंजारे नगरी नगरी अपना कहाँ ठिकाना है
सुबह जलाए चूल्हा-चाकी शाम हुए उठ जाना है
दो दिन बाद पकी हैं रोटी ,धुँआ लग गई कोठी में
महलों वाले सोच रहे हैं ,झुग्गी वाले हेंठी में
सुबह-शाम की भाग-दौड़ में जो कुछ हासिल हो पाया
लाद चले हैं खटिया-मचिया छोड़ यहीं सब जाना हैं
हम बंजारे नगरी नगरी ....
आती है आवाज़ कहीं से दूर क्षितिज के पार गगन
धीरे-धीरे बढ़ता जाता अवचेतन मन मगन मगन
एक तमाशा मेरे अन्दर सभी तमाशों में शामिल
हो जाएगा खतम तमाशा एक दिशा सब जाना है
हम बंजारे नगरी नगरी ....
जितना मिला उसी में जीना उतना मेरा राज महल
माटी का घट रोना क्या! मन क्यूँ रहता विकल-विकल
नीचे धरती की सैया है ऊपर नीली छतरी है -
चंवर डुलाते पेड़ खड़े हैं अपना यही खजाना है
हम बंजारे नगरी नगरी ...
सबके अपने- अपने कुनबे,अपनी राम कहानी है
सबके अपने अपने सपने सबकी व्यथा पुरानी है
ढाई-आखर' ही पढ़ने में बीत गई जब सारी उमरिया
जैसी ओढी रही चुनरिया वैसी ही धर जाना है
..
हम बंजारे नगरी नगरी अपना कहाँ ठिकाना है
सुबह जलाए चूल्हा-चाकी शाम हुए उठ जाना है
-आनंद
हम बंजारे नगरी नगरी अपना कहाँ ठिकाना है
सुबह जलाए चूल्हा-चाकी शाम हुए उठ जाना है
दो दिन बाद पकी हैं रोटी ,धुँआ लग गई कोठी में
महलों वाले सोच रहे हैं ,झुग्गी वाले हेंठी में
सुबह-शाम की भाग-दौड़ में जो कुछ हासिल हो पाया
लाद चले हैं खटिया-मचिया छोड़ यहीं सब जाना हैं
हम बंजारे नगरी नगरी ....
आती है आवाज़ कहीं से दूर क्षितिज के पार गगन
धीरे-धीरे बढ़ता जाता अवचेतन मन मगन मगन
एक तमाशा मेरे अन्दर सभी तमाशों में शामिल
हो जाएगा खतम तमाशा एक दिशा सब जाना है
हम बंजारे नगरी नगरी ....
जितना मिला उसी में जीना उतना मेरा राज महल
माटी का घट रोना क्या! मन क्यूँ रहता विकल-विकल
नीचे धरती की सैया है ऊपर नीली छतरी है -
चंवर डुलाते पेड़ खड़े हैं अपना यही खजाना है
हम बंजारे नगरी नगरी ...
सबके अपने- अपने कुनबे,अपनी राम कहानी है
सबके अपने अपने सपने सबकी व्यथा पुरानी है
ढाई-आखर' ही पढ़ने में बीत गई जब सारी उमरिया
जैसी ओढी रही चुनरिया वैसी ही धर जाना है
..
हम बंजारे नगरी नगरी अपना कहाँ ठिकाना है
सुबह जलाए चूल्हा-चाकी शाम हुए उठ जाना है
-आनंद
3 टिप्पणियां:
geet ne prabhavit kiya, is jaandar aur shandar post k liye badhai
खत्री जी!
सराहना व बधई के लिए धन्यवाद
--आनन्द
sabke apne apne kunbe.....................
wah. bahoot khoob. badhai.
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