रविवार, 28 जून 2020

चन्द माहिए : क़िस्त 72


क़िस्त 72 ओके

1
इक तो तेरा यौवन
यूँ ही कहर ढाता
उस पर यह अल्हड़पन

2
चलता न बहाना है
जब भी पुकारे वो
जाना ही जाना  है

3
वो पास मेरे जब से
खुद में नहीं ख़ुद हूँ
अब क्या माँगू रब से

4
क्या क्या न सहे हमने
तेरे जुल्मों पर
उफ़ तक न कहे हमने

5
मदमस्त हवाएँ है
तुम भी आ जाते
घिर आईं घटाएँ हैं

-आनन्द.पाठक



चन्द माहिए : क़िस्त 71


क़िस्त 71 ok

1
दिल है दरहम बरहम
चैन मिले कैसे
आँखें भी है पुरनम

2
दीदार न होना है
वाक़िफ़ हूँ मैं भी
बस ख़्वाब सजोना है

3
जीवन की राह अलग
कितना मैं झुकता
बस अपनी राह अलग

4
अब क्या उन से कहना
ज़ोर-ए-सितम उनका
दिल को है पड़ा सहना

5
उनकी ही निगहबानी
हाल हमारा क्या
बस रब की मिहरबानी

-आनन्द.पाठक-

चन्द माहिए : क़िस्त 70



चन्द माहिए : क़िस्त 70 ओके

1
 दुनिया का मेला है
ख़त्म हुआ ,साथी !
 चलने की बेला है।

2
कहने को कहता है
अपना होकर भी
दिल में कब रहता है

3
क्या क्या न कराती है
माया कुर्सी की
दस्तार गिराती है

4
क्या पाया ,क्या खोया
इसी ख़यालों में
दिन रात नहीं सोया

5
करता भी क्या करता
पर्दे के पीछे
इक और बड़ा परदा

-आनन्द.पाठक-