रविवार, 28 जून 2020

चन्द माहिए : क़िस्त 70



चन्द माहिए : क़िस्त 70

1

यह दुनिया का मेला
ख़त्म हुआ ,साथी !
अब चलने की बेला

2
कहने को है कहता
अपना होकर भी
दिल में वो नहीं रहता

3
क्या क्या न कराती है
माया कुर्सी की
तलुवे चटवाती  है

4
क्या पाया ,क्या खोया
इसी ख़यालों में
दिन रात नहीं सोया

5
जो होना है ,होगा
कर्म तुम्हारा ही
तुमने अपना भोगा


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