सोमवार, 29 जून 2020

चन्द माहिए : क़िस्त 77

क़िस्त 77

1
जब जान ही है लेना
और तरीक़े भी
बस रूठ के हँस देना

2
तुम पर न अगर मरता
तुम ही कहों जानम
दिल आख़िर क्या करता ?


3
कुछ चाह नहीं दिल में
तुम को ही देखूँ
बस माह-ए-कामिल में

4
इक प्यार को पा लेना
जैसे काँटॊं को
पलको से उठा लेना

5
दुनिया है सियह्खाना
शर्त रही ये भी
बेदाग़ निकल आना

-आनन्द.पाठक- 

कोई टिप्पणी नहीं: