रविवार, 28 जून 2020

चन्द माहिया : क़िस्त 64


क़िस्त 64
1
घिर घिर आए बदरा
बादल बरसा भी
भीगा न मेरा अँचरा

2
कुछ सपने दिखला कर
लूट लिए मुझको
सपनों के सौदागर

3
कुछ रंग लगा ऐसा
मैं भी बन जाऊँ
कुछ कुछ तेरे जैसा
4
सब प्यार जताते हैं
कौन हुआ किसका
सब अपनी गाते हैं
5
माजी की यादें हैं
लगता है जैसे
कल की ही बातें हैं

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