रविवार, 28 जून 2020

चन्द माहिया : क़िस्त 66


क़िस्त 66

1
कब इश्क़ रहा आसाँ
चल ही पड़ा है तो
रोता क्यों दिल-ए-नादाँ
2
दिल था भोला भाला
होम किया जब जब
ख़ुद हाथ जला डाला

3
तुमको तो नहीं आना
मान लिया मैनें
दिल है कि नहीं माना

4
दीदार न होना है
वाक़िफ़ हूँ मैं भी
पर ख़्वाब सजोना है

5
कब तुमने निभाया है
झूठे वादे पर
दिल फिर भी आया है



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