रविवार, 28 जून 2020

चन्द माहिए : क़िस्त 72


क़िस्त 72

1
इक तो तेरा यौवन
यूँ ही कहर ढाता
उस पर यह अल्हड़पन

2
चलता न बहाना है
जब भी पुकारे वो
जाना ही जाना  है

3
अब क्या माँगू रब से
खुद में नहीं ख़ुद हूँ
वो पास मेरे जब से

4
क्या क्या न सहे हमने
तेरे जुल्मों पर
उफ़ तक न कहे हमने

5
मदमस्त हवाएँ है
तुम भी आ जाते
घिर आईं घटाएँ हैं



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