बुधवार, 13 अगस्त 2025

एक सूचना : नए यू-ट्यूब चैनेल के बारे में

  एक सूचना --नए ’यू-ट्यूब ’ चैनेल के बारे में 

गुरुवार, 17 जुलाई 2025

चंद माहिए 109/19 [सावन पर]

क़िस्त 109: -[सावन पर]

:1: 
बारिश लगती है भली
खेल रहे बच्चे
कागज की नाव चली

:2:
सबने है ये माना
पिंजरे से इक दिन
पंछी को उड़ जाना ।

:3:
क्यॊं आँखें हैं पुरनम
लेकर चलती हो
क्यों दुनिया भर का ग़म ।

:4:
सावन भी अब बीता
आई न जब तुम तो
मौसम फ़ीका फ़ीका ।

:5:
फिर घिर आए बादल
भीगेंगा जब तन
मन फिर होगा पागल ।

-आनन्द.पाठक-

चन्द माहिये: 109/19

चंद माहिए : क़िस्त 109/19 


:1:

बदरा बरसै रिमझिम

आग लगाता है

तन में मद्धिम मद्धिम ।


:2:

शैलाब है जब आता 

बादल जब फटता

मन अपना डर जाता ।


:3:

उड़ता तेरा आँचल

नील गगन में ज्यों

उड़ता रहता बादल ।


:4:

कुछ भी ना कहती हो

अन्दर ही अन्दर 

बस घुटती रहती हो ।


:5:

क्या तुम को सुनानी है

जैसे सबकी है

अपनी भी कहानी है ।


-आनन्द.पाठक-