रविवार, 21 मई 2017

चन्द माहिया : क़िस्त 40

चन्द माहिया : क़िस्त 40

:1:
जीवन की निशानी है
रमता जोगी है
और बहता पानी है

;2:
मथुरा या काशी क्या
मन ही नहीं चमका
घट क्या ,घटवासी क्या

:3:
ख़ुद को देखा होता
मन के दरपन में
क्या सच है ,पता होता

:4:
बेताब न हो , ऎ दिल !
सोज़-ए-जिगर तो जगा
फिर जा कर उन से मिल


5
इतना ही समझ लेना
 मै हूँ तो तुम हो
 क्या और सनद देना


-आनन्द.पाठक-
[सं 15-06-18]

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