रविवार, 20 सितंबर 2020

चन्द माहिए : क़िस्त 81

 क़िस्त 81 ओके
1
इतना न झुकाओ सर
ध्यान रहे इतना
दस्तार रहे सर पर 

2
हलचल सी है मन में 
महकीं फिर यादें
मन के इस उपवन में 

3
कुछ लुत्फ़-ओ-इनायत भी
उल्फ़त में  होती
कुछ शिकवा शिकायत भी

4
जो कह न सकी वो भी
सुन मेरे माही !
जो सह न सकी वो भी

5
बदरा बरसै  झम झम
नाचै मन मोरा
पायल बोले  छम छम 
-आनन्द.पाठक-

चन्द माहिए : क़िस्त 80


क़िस्त 80: ओके
 1
यूँ रस्म-ए-वफ़ा सब से
रहती है उन की
हम से  हैं ख़फ़ा कब से 

2
ऐसी भी इयादत क्या
ग़ैरों से पूछो
’आनन’ की हालत क्या ?

3
ग़ैरों से रफ़ाक़त है
लेकिन मुझ से ही
बस उनको शिकायत है


"झूठी यह कहानी है "
हँस देती हो तुम 
जाओ , न सुनानी है 

5
 कलियों पर जब छलके
मदमाता  यौवन
गुलशन गुलशन महके
-आनन्द.पाठक-

चन्द माहिए : क़िस्त 79

 क़िस्त 79 : ओके


1
 ग़म अपना ढो लेंगे
पूछोगी जब तुम
"अच्छा हूँ’-बोलेंगे
2
माना जख़्मी है दिल
कैसे समझे तुम 
यह इश्क़ के नाक़ाबिल ?
3
 कैसी  ये शरारत है 
चिलमन में छुप कर
करता वो इशारत है 
4
जख़्मों को छुपा रखना
कम तो नहीं ’आनन’ 
ग़म अपना दबा रखना
5
यह जादू किसका  है ?
उजड़े चमन में भी
यह नूर जो छिटका है


-आनन्द पाठक-
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