सोमवार, 29 जून 2020

चन्द माहिए : क़िस्त 77

क़िस्त 77 ओके

1
जब जान ही है लेना
और तरीक़े भी
बस रूठ के हँस देना

2
तुम पर न अगर मरता
तुम ही कहों जानम
दिल आख़िर क्या करता ?

3
कुछ चाह नहीं दिल में
तुम को ही देखूँ
इक माह-ए-कामिल में

4
इक प्यार को पा लेना
 काँटॊं को जैसे
पलको से उठा लेना

5
दुनिया है सियह्खाना
शर्त मगर ये भी
बेदाग़ निकल आना

-आनन्द.पाठक- 

चन्द माहिए : क़िस्त 76

क़िस्त 76 ओके

1
पूछो मत सब बातें
कैसे कटती हैं
तुम बिन मेरी रातें

2
सपने तो सुला देंगे
याद तुम्हारी सब
हम कैसे भुला देंगे ?

3
वादा न निभाओगी
झूठी कसमें ही ?
क्या खाते जाओगी?

4
तनहा तनहा रातें
कोई नहीं, मेरी
सुन ले दिल की बातें

5
इतने न भले हो तुम
जैसे दिखते हो
भीतर से जले हो तुम

-आनन्द.पाठक-

चन्द माहिए : क़िस्त 75

क़िस्त 75 ओके

1
क्या वस्ल की रातें थीं
और न था कोई
हम तुम थे,बातें थीं

2
मासूम सी अँगड़ाई
जब जब ली तुम ने
बागों में बहार आई

3
साँसों में घुली हो तुम
सिमटी रहती हो
अबतक न खुली हो तुम

4
रौनक है महफ़िल की
एक हँसी तेरी
जीनत है हर दिल की

5
हँसती हुई राहों में
दर्द भरा किसने
ख़ामोश निगाहों में


-आनन्द पाठक-