दोहे 009 : चुनावी दोहे
हाथ जोड़ मिलते रहें, जनता से दिन-रात ॥
रस्सी तनी चुनाव की, नेता जी चढ़ जाय ।
देख संतुलन पाँव के, नट-नटिनी शरमाय ॥
नेता जी करने लगे , अब हमाम की बात ।
बाहर चाहे जो दिखें, भीतर सब को ज्ञात ॥
दरवाजे सब बंद है, नई हवा ना आय ।
सड़ी गली सी सोच से. धुँआ धुँआ भर जाय ॥
ढकी रहे उतनी भली, हर चुनाव अभियान ।
बीच सड़क मत धोइए, चड्डी औ’ बनियान ॥
जनता ही समझी नहीं ,मेरो काम महान ।
वरना हम कब हारते, इस चुनाव दौरान॥
नेता जी जो कर रहें-" 'जनता' जिंदाबाद ।
ढूँढे से भी ना मिलें, फिर चुनाव के बाद" ॥
-आनन्द पाठक ’आनन’-
8800927181
05/26
2 टिप्पणियां:
vah ji bahut sunder aj ke liye steek dohe abhar
janta hi nahi samjhi mere karya mahan varna ham nahi harte is chunav dauran
प्रिय कपिल जी
आप को दोहे का व्यग चुभ गया
उत्साह वर्धन के लिए धन्यवाद
--आनन्द
एक टिप्पणी भेजें