गुरुवार, 31 अगस्त 2023

ग़ज़ल 336[12F] : इश्क़ क्या है ? न मुझको बताया करो

 ग़ज़ल 336 [12F]


212---212---212---212


इश्क़ क्या है? न मुझको बताया करो
जो पढ़ी हो, अमल में भी लाया  करो  ।

गर ज़ुबाँ से हो कहने में दुशवारियाँ
तो निगाहों से ही कह के जाया करो ।

जो रवायत ज़माने के नाक़िस हुए
छोड़ दो, कुछ नया आज़माया करो ।

दोस्ती भी इबादत से है कम नही
बेगरज़ साथ तुम भी निभाया करो ।

रहबरी है तुम्हारी कि साज़िश है कुछ
जानते हैं सभी , मत छुपाया करो ।

जो अँधेरों में है उनके दिल में कभी
इल्म की रोशनी तो जगाया करो ।

नाम ’आनन’ का तुमने सुना ही सुना
जानना हो तो घर पे भी आया करो ।


-आनन्द पाठक--

सं 28-06-24


कोई टिप्पणी नहीं: