गुरुवार, 16 सितंबर 2021

कविता 008 : कितना आसान होता है

 
-कविता-008 

 
कितना आसान होता है
किसी पर कीचड़ उछालना
किसी पर उँगली उठाना
आसमान पर थूकना
पत्थर फेकना।
मासूम परिन्दों को निशाना बनाना
कितना आसान होता है
किसी लाइन को छोटा करना
उसे मिटाना
आग लगाना, आग लगा कर फिर फ़ैलाना
अच्छा लगता है
अपने को कुछ बड़ा दिखाना।
बड़ा समझना
तुष्टि अहम की हो जाती है
उसको सब अवसर लगता है
सच से उसको डर लगता है ।


 -आनन्द.पाठक ’आनन’-

8800927181

यह कविता मेरी आवाज़ में सुने---





शनिवार, 11 सितंबर 2021

अनुभूतियाँ : क़िस्त 011

 
क़िस्त 011
 
41
 पास पास जब दो बरतन हों
लाजिम उनका टकराना है।
छोड़ो छॊटी-मोटी अनबन
बोलो वापस कब आना है ?
 
42
दशकों का था साथ पुराना,
चाँदी से तुम मोल लगाए ।
सत्य यही है अगर तुम्हारा
तो फिर कौन तुम्हें समझाए?
 
43
चाँद सितारों वाली बातें,
लिख्खी हुई किताबों में हैं।
चाँद तोड़ कर लाने वाली
बातें केवल बातॊं में हैं ।
 
44
एक नहीं मैं ही दुनिया में
जिसकी कोई व्यथा पुरानी ।
यहाँ हज़ारों मिल जाएगीं
मेरी जैसी  विरह कहानी ।
 
-आनन्द.पाठक ’आनन’-
 8800927181
 

गुरुवार, 9 सितंबर 2021

रिपोर्ताज़ 08: :मेरी किताब : सुन मेरे माही !- का प्रकाशन के संदर्भ में


 

रिपोर्ताज़ 10 :  :मेरी किताब : सुन मेरे माही !- का प्रकाशन के संदर्भ में

 एक सूचना =  पुस्तक प्रकाशन के सन्दर्भ में

मित्रो !

सूचित करते हुए हर्ष की अनुभूति हो रही है  कि आप लोगों के आशीर्वाद और शुभकामनाओं से मेरी सातवीं  पुस्तक -" सुन, मेरे माही ! "- [ माहिया- संग्रह ] प्रकाशित हो कर आ गई ।

इस से पूर्व मेरी -6-पुस्तकें [ 3- कविता/ग़ज़ल/गीत संग्रह और 3- हास्य व्यंग्य़ संग्रह] प्रकाशित हो चुकी हैं । इन सभी पुस्तकों का प्रकाशन "अयन प्रकाशन, नई दिल्ली " ने किया है ।

"अयन-प्रकाशन’ को इस हेतु बहुत बहुत धन्यवाद।

 

इस संग्रह में मेरी 450 माहिए संकलित है जिसमे से कुछ माहिए आप लोगो ने इस मंच पर समय समय पर अवश्य पढ़ी होंगी ।

इस संग्रह में मैने माहिए के उदभव, विकास और माहिए के वज़न और बह्र के बारे में भी चर्चा की है।

आशा करता हूँ कि इस संग्रह को भी पूर्व की भाँति आप सभी लोगो का स्नेह और आशीर्वाद मिलता रहेगा।

 

पुस्तक प्राप्ति के लिए अयन प्रकाशन से सम्पर्क किया जा सकता है । उनका पता है संलग्न है ।

whatsapp no = 92113 12372 [ संजय जी ]

{नोट : प्रकाशक यह पुस्तक शीघ्र ही Amazon पर उपलब्ध करा देगा ]

 

पुस्तक मिलने का पता –

 अयन प्रकाशन

1/20 महरौली, नई दिल्ली 110 030


शाखा—जे-19/39 राजापुरी. उत्तम नगर , नई दिल्ली-59

Email : ayanprakashan@gmail.com

Website : www.ayanprakashan.com

 

   -सादर-

-आनन्द.पाठक-