शनिवार, 9 सितंबर 2023

ग़ज़ल 339 [15F] : तुमने जैसा कहा मैने वैसा किया

ग़ज़ल 339[15F]

212---212---212---212--


तुम ने जैसा कहा मैने वैसा किया
फ़िर बताओ कि मैने बुरा क्या किया ?

हाथ की तुम लकीरें रहे देखते
बाजुओं पर न तुमने भरोसा किया ।

ध्यान में वह नहीं था, कोई और था
बस दिखावे का ही तुमने सज्दा किया ।

इश्क़ क्या चीज़ है, तुमको क्या है पता
इश्क़ के नाम पर बस तमाशा किया ।

राह-ए-हक़ में क़दम दो क़दम क्या चले
चन्द लोगों ने मुझ से किनारा किया ।

क्यों जुबाँ लड़खड़ाने लगी आप की
आप ने कौन सा सच से वादा किया ।

बात ’आनन’ की चुभने लगी आप को
सच की जानिब जब उसने इशारा किया ।


-आनन्द.पाठक--

सं 28-06-24


सोमवार, 4 सितंबर 2023

ग़ज़ल 338[14F] :आप से अर्ज ए हाल है साहिब

ग़ज़ल 338 [14F]
2122   1212   22

आप से अर्ज-ए-हाल है, साहिब !
जिंदगी पाएमाल  है साहिब !

रोज जीना है रोज मरना है
यह भी खुद मे कमाल है, साहिब !

अब फरिश्ते कहाँ उतरते हैं ,
आप का क्या खयाल है साहिब ?

रोशनी देगा या जला देगा-
हाथ उसके मशाल है, साहिब !

सिर्फ टी0वी0 पे दिन दिखे अच्छे, 
सबको इसका मलाल है साहिब !

जिंदगी शौक़ है कि मजबूरी ?
यह भी कैसा सवाल है, साहिब !

लोग 'आनन'  को हैं बुरा कहते
चन्द लोगों की चाल है साहिब !

-आनन्द पाठक-

सं 28-06-24

शनिवार, 2 सितंबर 2023

ग़ज़ल 337[13 F] : खुशियों का ज़िंदगी में अभी सिलसिला नहीं

 ग़ज़ल 337 [13F]

221---2121---1221---212


खुशियों का ज़िंदगी में अभी सिलसिला नहीं
मैने भी ज़िंदगी से अभी कुछ कहा नहीं ।

हालात-ए-ज़िंदगी से कोई ग़मज़दा न हो
ऐसा तो कोई शख़्स अभी तक मिला नहीं ।

नफ़रत की आँधियॊं से उड़ा आशियाँ  मेरा
ज़ौर-ओ-सितम से एक भी तिनका बचा नहीं

दीवार थी गुनाह की दोनों के बीच में ,
वरना था दर्मियान कोई फ़ासला नहीं ।

वैसे कहानी आप की तो बारहा सुना
फिर भी नई नई सी लगी, दिल भरा नहीं ।

नदिया में प्यास की न तड़प ही रही अगर
सागर से फिर मिलन का असर खुशनुमा नहीं ।

’आनन’ ख़याल-ओ-ख़्वाब में इतना न डूब जा
दुनिया की साज़िशों का तुझे हो पता नही ।


-आनन्द पाठक-

सं 28-06-24