शनिवार, 29 मई 2021

ग़ज़ल 174 : किसी के प्यार में ये दिल लुटा दिया मैने

 1212---1122---1212--112/22


ग़ज़ल 174

किसी के प्यार में यह दिल लुटा दिया मैने
हसीन जुर्म पे ख़ुद को सज़ा  दिया  मैने ।

तलाश जिसकी थी वो तो नहीं मिला फिर भी
तमाम उम्र उसी में गँवा दिया मैने ।

भटक न जाएँ मुसाफ़िर कहीं अँधेरों में
चिराग़ राह में दिल का जला दिया मैने ।

जहाँ भी नक़्श-ए-क़दम आप का नज़र आया
मुक़ाम-ए-ख़ास समझ, सर झुका दिया मैने ।

इसी उमीद  में जीता रहा कि आओगे
ख़बर न आई तो दीया बुझा दिया मैने ।

नहीं हूँ फ़ैज़ तलब जो भी फ़ैसला कर दो
गुनाह जो भी था अपना बता दिया मैने ।

लगे न दाग़ कहीं इश्क़ पाक है ’आनन’
फ़ना का रस्म था वो भी निभा दिया मैने ।

-आनन्द.पाठक-

शब्दार्थ
फ़ैज़-तलब = यश का आकांक्षी
मुक़ाम-ए-ख़ास = विशिष्ट स्थान
फ़ना = प्राणोत्सर्ग

To visit my channel CLICK the Link below
www.youtube.com/@33akp

बुधवार, 26 मई 2021

ग़ज़ल 173 :पास मेरे था उसका पता उम्र भर--

 212---212---212---212
फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़ाइलुन
बह्र-ए-मुतदारिक मुसम्मन सालिम


ग़ज़ल 173

पास मेरे था उसका पता उम्र भर
लाख ढूँढा उसे ,ना मिला उम्र भर

बारहा वह मिला मैने देखा नहीं
बीच में थी खड़ी इक अना उम्र भर

आप से क्या मिले इक घड़ी दो घड़ी
ख़ुद से ख़ुद ही रहा मैं जुदा उम्र भर

क्या ग़लत, क्या सही, क्या गुनह, क्या सवाब
मन इसी में उलझता गया उम्र भर

ज़ाहिरी तौर पर हों भले हम सुखन 
आदमी आदमी से डरा उम्र भर

पास आया भी वह , मुस्कराया भी वह
पर बनाए रहा, फ़ासिला उम्र भर 

छोड़ कर वह गया जब से ’आनन’ मुझे
फिर न कोई मिला दूसरा उम्र भर

-आनन्द.पाठक-
शब्दार्थ 
अना = अहम ,अहंकार
गुनह ,सवाब = पाप पुण्य
हमसुखन = बात करने वाले दोस्त

To visit my channel CLICK the Link below
www.youtube.com/@33akp

रविवार, 23 मई 2021

ग़ज़ल 172 : जो कहा तुमने ---

 2122---1212---112/22
ग़ज़ल 172

जो कहा तुमने ,मैने माना है
जानता था कि वो बहाना है

बारहा ज़िन्दगी नहीं मिलती
जो मिली है  उसे निभाना है

हसरतें दिल की दिल में दफ़्न हुईं
राज़ यह भी नहीं बताना है

मौत उलझी हुई पहेली है
ज़िन्दगी इक नया फ़साना है

एक रिश्ता अज़ल से है क़ायम
क्या नया और क्या पुराना है 

इश्क़ की राह में सुकून कहाँ
साँस जब तक है चलते जाना है

किस  ख़ता की सज़ा है ये,’आनन’
रुख से पर्दा नहीं उठाना है 

-आनन्द.पाठक-
शब्दार्थ
बारहा = बार बार
अज़ल = आदि काल से  
To visit my channel CLICK the Link below
www.youtube.com/@33akp