शनिवार, 18 फ़रवरी 2023

ग़ज़ल 309 [74इ] : अवाम जो भी सुनाए उसे सुना करिए

 ग़ज़ल 309


1212---1122--1212--22


अवाम जो भी सुनाए उसे सुना करिए
हवा का रुख भी ज़रा देखते रहा करिए

हुजूम आ गया सड़कों पे तख़्तियाँ लेकर
कभी तो हर्फ़-ए-इबारत जरा पढ़ा करिए

हर एक बात मेरी फूँक कर उड़ा देना
हुजूर दर्द सलीक़े से तो सुना करिए

ज़ुबान आप की है आप को मुबारक हो
जलील-ओ-ख्वार तो कम से न कम किया करिए

तमाशबीन ही बन कर न देखिए मंज़र
जनाब वक़्त ज़रूरत पे तो उठा करिए

चला किए है अभी तक किसी के पैरों से
उतर के पाँव पे अपने, कभी चला करिए

सही है बात बुरा मानना नहीं ’आनन’
बँधी हो आँख पे पट्टी, किसी का क्या करिए


-आनन्द.पाठक-

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2023

ग़ज़ल 308[73 इ] : इश्क़ क्या है, दो दिलों की बस्तगी है


ग़ज़ल 308

2122---2122---2122


इश्क़ क्या है? दो दिलों की बस्तगी है 
एक ने’मत है , खुदा की बंदगी  है

राह-ए-उलफ़त का सफ़र क्या तय करेगा
सोच में ही जब तेरी आलूदगी है

इश्क़ कब अंजाम तक पहुँचा हमारा
इक अधूरी सी कहानी ज़िंदगी है

लोग हैं खुशबख़्त जिनको प्यार हासिल
चन्द लोगों के लिए यह दिल्लगी है

आप का मैं मुन्तज़िर जब से हुआ हूँ
एक मैं हूँ इक मेरी शाइस्तगी है

दूसरा चेहरा नज़र आता नहीं अब
जब से मेरे दिल से उनकॊ लौ लगी है

आप आनन को भले समझे न समझें
दिल में मेरे आज भी पाकीजगी है ।


-आनन्द.पाठक-

शब्दार्थ

बस्तगी = लगाव खिंचाव

ने’मत = ईश्वरी कूपा

आलूदगी = खोट, मिलावट,अपवित्रता

मुन्तज़िर = प्रतीक्षक इन्तज़ार करने वाला

शाइस्तगी = शिष्टता शराफ़त

पाकीजगी =पवित्रता


गुरुवार, 16 फ़रवरी 2023

ग़ज़ल 307[72इ] : बात मे उसके रही कब पुख्तगी है

 ग़ज़ल 307

2122--2122--2122

 

बात में उसकी  रही कब पुख्तगी  है
सोच में साजिश भरी है, तीरगी है

एक चेहरे पर कई चेहरे लगाता
पर चुनावों में भुनाता सादगी है

लग रही है कुछ निज़ामत में कमी क्यों
लोग प्यासे हैं लबों पर तिश्नगी है

घर के आँगन में उठीं दीवार इतनी
मर चुकी आँखों की अब वाबस्तगी है

रोशनी देखी नहीं जिसने अभी तक
जुगनुओं की रोशनी अच्छी लगी है

चन्द लोगों के यहाँ जश्न-ए-चिरागाँ
बस्तियों में दूर तक बेचारगी है

भीड़ में क्या ढूँढते रहते हो ’आनन’
अब न रिश्तों में रही वो ताजगी है ।


-आनन्द पाठक-

शब्दार्थ 

पुख्तगी = दृढ़ता, स्थायित्व

निज़ामत = शासन व्यवस्था

वाबस्तगी = लगाव खिंचाव

जश्न-ए-चिरागाँ = रोशनी का त्यौहार

तीरगी = अँधेरा