मंगलवार, 6 जनवरी 2026

अनुभूतियाँ 188/75

 अनुभूतियाँ 188/75

:1:
कैसे छुपा सकोगी बातें-
राज़ आँख से खुल जाती हैं ।
विरह वेदना मन की पीड़ा
कब आँसू से धुल पाती हैं ।

;2;
मन महका महका सा रहता
खुशियों का फिर रहता मौसम।
यह वक्त हमारा भी होता ,
तुम साथ अगर देते हमदम ।

:3:
यह प्रश्न तुम्हारा बेमानी
किसने किससे मुुँह मोड़ा है।
प्रारब्ध कहूँ, दुर्भाग्य कहूँ
किसने किसका दिल तोड़ा है। 

:4:
 एक बात बतला कर जाना
लौट  के आना है क्या मुमकिन?
वरना तो जीने की खातिर
आँसू तनहाई है हर दिन ।

-आनन्द पाठक 'आनन'-

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