गुरुवार, 22 सितंबर 2022

अनुभूतियाँ : किस्त 024

 अनुभूतियाँ 024 ओके
93
गुलशन गुलशन ख़ुशबू महके
और हवाएँ हों आवारा ,
जितना जीना जी ले, प्यारे !
कब मिलता जीवन दोबारा !
 
94
बोझ अगर है इन कंधों पर
सिर्फ़ तेरे जाने का ग़म है
वरना तो दिल बहलाने को
यादें हैं, आँखें पुरनम है ।  
 
95
दान नहीं, सौगात नहीं यह
खुद है सँवारा जीवन अपना,
भला बुरा या चाहे जैसा
मेरा जीवन, मधुवन अपना
 
96
उन बातों को दुहराना क्या
घुमा-फिरा कर बात वही है,
व्यर्थ बहस अब क्या करना है
कौन ग़लत था, कौन सही है ।
 
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