शनिवार, 10 जुलाई 2021

ग़ज़ल 181 : रिश्तों की बात कौन ---

 ग़ज़ल 181
221---2121---1221---212

रिश्तों की बात कौन निभाता है आजकल 
वह बेग़रज़ न हाथ मिलाता  है आजकल

यह और बात है उसे सुनता न हो कोई
फिर भी वो मन की बात सुनाता है आजकल

कहना तो चाहता था मगर कह नहीं सका
कोई तो दर्द है ,वो छुपाता  है आजकल

लोगों के अब तो तौर-तरीक़े बदल गए
किस दौर की तू बात सुनाता है आजकल 

मौसम चुनाव का अभी आने को है इधर
वह ख़्वाब रोज़-रोज़  दिखाता है आजकल

सच बोल कर भी देख लिया ,क्या उसे मिला ?
वह झूठ की दुकान चलाता है आजकल 

’आनन’ बदल सका न ज़माने के साथ साथ
आदर्श का वो कर्ज़ चुकाता है आजकल ।

-आनन्द पाठक-
To visit my channel CLICK the Link below
www.youtube.com/@33akp

कोई टिप्पणी नहीं: