521
राम लला जी के मंदिर का
संघर्षों की एक कहानी
नई फ़सल अब क्या समझेगी
प्राण दिए कितने बलिदानी
522
पावन क्षण में पावन मन से
पूजन अर्चन शत शत वंदन
स्वागत में हम खड़े राम के
लेकर अक्षत रोली चंदन
523
जन मन में अब राम बसे हैं
हर्षित हैं सब अवध निवासी
सब पर कृपा राम की होती
जन मानस,साधु सन्यासी
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जब तक राम हृदय में बसते
वरना तो कुरसी की खातिर
सबके अपने अपने रस्ते
-आनन्द.पाठक-