रविवार, 24 दिसंबर 2023

ग़ज़ल 348 [24F]: समन्दर की व्यथा क्या है

 ग़ज़ल 348[24F]

1222  1222


समन्दर की व्यथा क्या है
ये नदिया को पता क्या है ।

उड़ानों में परिंदो से
न पूछो मर्तबा क्या है

जो पगड़ी बेंच दी तुमने
तो बाक़ी अब बचा क्या है

किसी के वास्ते हमदम !
समय रुकता भला क्या है ?

गले सबको लगा .प्यारे!
कि दुनिया में रखा क्या है ।

मुहब्बत में फ़ना होना
तो इसमें कुछ नया क्या है ।

हिमायत सच की करते हो
अरे! तुमको हुआ क्या है

कभी मिलना जो ’आनन’ से
समझ लोगे वफ़ा क्या है ।


-आनन्द.पाठक-

सं 28-06-24