शुक्रवार, 16 अगस्त 2024

दोहा 22 : सामान्य दोहे

दोहा 22 : सामान्य दोहे

:1:

बातें उनकी लाख की, अपना ही गुणगान ।
ऊँची ऊँची फेंकते , पंडित बने महान ॥

:2:
बरगद की  छाया सदा, सबको एक समान ।
क्या राजा,क्या रंक हो, क्या साधू शैतान  ॥

:3:
अकस्मात वह हो गया जब से मालामाल ।
तब से चलने लग गया टेढ़ी टेढ़ी चाल ।।

:4:
रात घनेरी हो भले, नहीं छोड़ना आस ।
हिम्मत कभी न हारना, डिगे नहीं विश्वास ॥

:5:
मन के अंदर तो भरा, लोभ, मोह, मद क्रोध ।
आएँगे कैसे हरी , मन तो पहले शोध ॥

:6:
हवा हवाई बात से, बने न कोई काज
यह तो वह भी जानता, कब आता है बाज

:7:
प्रीत न जानै रीति कुछ, जाने बस इक राह
आजीवन आनन्द या, आजीवन बस आह

-आनन्द पाठक "आनन'
05/26





कोई टिप्पणी नहीं: