अनुभूतियाँ 148/35
589
सदा बसें हिरदय में मेरे
राम रमैया सीता मैया
अंजनि पुत्र केसरी नंदन
साथ बिराजै लछमन भैया
590
हो जाए जब सोच तुम्हारी
राग द्वेष मद मोह से मैली
राम कथा में सब पाओगे
जीवन के जीने की शैली ।
:591
एक बार प्रभु ऐसा कर दो
अन्तर्मन में ज्योति जगा दो
काम क्रोध मद मोह तमिस्रा
मन की माया दूर भगा दो ।
592
इस अज्ञानी, इस अनपढ़ पर
कृपा करो हे अवध बिहारी
भक्ति भाव मन मे जग जाए
कट जाए सब संकट भारी
-आनन्द.पाठक-
589
सदा बसें हिरदय में मेरे
राम रमैया सीता मैया
अंजनि पुत्र केसरी नंदन
साथ बिराजै लछमन भैया
590
हो जाए जब सोच तुम्हारी
राग द्वेष मद मोह से मैली
राम कथा में सब पाओगे
जीवन के जीने की शैली ।
:591
एक बार प्रभु ऐसा कर दो
अन्तर्मन में ज्योति जगा दो
काम क्रोध मद मोह तमिस्रा
मन की माया दूर भगा दो ।
592
इस अज्ञानी, इस अनपढ़ पर
कृपा करो हे अवध बिहारी
भक्ति भाव मन मे जग जाए
कट जाए सब संकट भारी
-आनन्द.पाठक-
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