शुक्रवार, 6 सितंबर 2024

ग़ज़ल 422 [ 71-फ़] : हाल इतना तेरा बुरा तो नहीं-

 ग़ज़ल 71-फ़

2122---1212---112


हाल इतना तेरा बुरा तो नहीं ।
वक़्त तेरा अभी गया तो नहीं ।

सामने हैं अभी खुली राहें ,
हौसला है,अभी मरा तो नहीं ।

एक दीपक तमाम उम्र जला
आँधियों से कभी डरा तो नहीं ।

जानता हूँ तू बेवफ़ा न सही
चाहे जो है तू बावफ़ा तो नहीं ।

इश्क अंजाम तक भले न गया
इश्क करना कोई ख़ता तो नहीं ।

आँख तेरी है क्यूँ छलक आई,
ज़िक्र मेरा कहीं हुआ तो नहीं ?

बात यह भी तो है सही ’आनन’
ज़िन्दगी क़ैद की सज़ा तो नहीं ।


-आनन्द.पाठक-


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