अनुभूतियाँ : क़िस्त 089 ओके
353
कौन बुझा पाया है अब तक
प्रेम अगन जो लगी हो तन में,
अन्तिम साँसों तक जलती है
सच्ची लगन अगर हो मन में।
354
जीवन के हर एक
मोड़ पर
कई अजनबी चेहरे उभरे
साथ चले कुछ छोड़ गए कुछ
पल दो पल के ख़्वाब सुनहरे
355
मेरी नहीं तो अपने दिल की
कभी कभी तो बातें सुन लो,
सत्य-झूठ की राहें सम्मुख
जो चाहे तुम राहें चुन लो |
356
सत्ता उसकी नूर उसी का
जड़-चेतन में वही समाया,
प्राणी अपने मद में खोया
सीधी बात समझ ना पाया
353
कौन बुझा पाया है अब तक
प्रेम अगन जो लगी हो तन में,
अन्तिम साँसों तक जलती है
सच्ची लगन अगर हो मन में।
कई अजनबी चेहरे उभरे
साथ चले कुछ छोड़ गए कुछ
पल दो पल के ख़्वाब सुनहरे
मेरी नहीं तो अपने दिल की
कभी कभी तो बातें सुन लो,
सत्य-झूठ की राहें सम्मुख
जो चाहे तुम राहें चुन लो |
सत्ता उसकी नूर उसी का
जड़-चेतन में वही समाया,
प्राणी अपने मद में खोया
सीधी बात समझ ना पाया
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